Saturday, 15 March 2008

तलाश अपनी जड़ों की

डॉ नवरस आफरीदी कुब्बतुस्सख्रा की मस्जीद के सामने येरूशलम, इसराइल में
मलीहाबाद को इसराइल से जोड़ता है एफ्राइम कबीला

अपराजीता श्रीवासतव, सिटी, हिंदुस्तान, लख, २४ अप्रैल, २००६

अगर कोई एक दम से पूछ बैठे की लख और इसराइल में कोई नाता है या नहीं. टू हम में से ज्यादातर लोगों का जवाब होगा 'नहीं'. थोडा रुकिए नाता टू है. इसराइल के लुप्त्प्राये कबीले 'एफ्राइम' की खासी आबादी आज अपने मलिहाबाद में है. इस हैरातान्गेज़ राज़ को खोला है अपने शहर के एक युवक ने. उस युवा ने इस विषय पर गहन शोध किया है. नवरस आफरीदी का शोध अपराजिता श्रीवास्तव की कलम से

मलीहाबाद में, अपनी दीलेरी और जानबाजी के लिए मशहूर , आफरीदी पठानों की छोटी सी आबादी रहती हैआफरीदी पठान मूल रूप से अफ्घान-पाक सीमा के पर्वतिये इलाके के रहने वाले हैं१७६१ के कुछ दशक पहले आफरीदी पठान यहाँ बसेआज हालत यह हैं की यह अपनी बुनियाद, अपनी जड़ों से बेखबर हैंयह लोग ख़ुद भी नहीं जानते की वे दुनिया के किस कोने से तालुक रखते हैंअपनी जड़ों से हजारों किलोमीटर दूर बसे इन लोगों का इतिहास खोजा है नवरस आफरीदी नेनवरस लखविश्वविद्यालय में शोध छात्र हैंनवरस आफरीदी के रीसर्च में निकल कर सामने आया है की यह आफरीदी पठान वास्तव में में इसराइल का लुप्त कबीला इफ्राइम है

नवरस के शोध 'भार्तिये यहूदी तथा भारत में इसराइल के लुप्त कबीले' में यह तथ्य उजागर हुए की ७२१ ईसा पूर्व में असीरियाई हमले के कारन इफ्राइम सहित दस कबीलों को इसराइल छोड़ना पडाइसके बाद यह कबीले , यहाँ के लोग कहाँ गए किसी को कुछ नहीं मालूम थाइस शोध में यह बात सामने आयी की असीरियाई हमले के बाद इस कबीले के कुछ लोग अफ्घान-पाक सीमा के पर्वतिये इलाके में बसेदस्तावेज़ इस और इशारा करते हैं की मलीहाबाद में पठान टैब से रह रहे हैं जब सं १२०२ के आस-पास मुहम्मद बख्तियार खल्जी के नाम पर बख्तियार्नगर गाँव बसा थावैसे अधिकतर पठान आबादी १७वीं शताब्दी के दौरान यहाँ आएसं १७४८ से १७६१ के बीच अहमद शाह अब्दाली की हमलों के दौरान आफरीदी पठान सैनीक भारत आए और यहाँ के होकर रह गएजब वे भारत के घैर-पठान मुसलमान इलाकों में आकर बसे टू उन्होनें यही उचित समझा की अपने इजराइली अतीत का उल्लेख ना करें / परिणाम स्वरूप उनकी आगामी नस्लें अपनी इज्राएली उत्पत्ति से अनजान की रह गयी

अपने शोध को पुख्ता करने के लिए नवरस ने ५० अलग-अलग आफरीदी पठान परिवारों के पुरषों के ड़ी एन इकखट्टे कीइन पर लंदन के एक अनुसंधान केन्द्र में विश्लीशन हो रहा हैआफरीदी पठानओं के इज्राएली सम्भंद को ड़ी एन की सहायता से सामने लाने के लिए नवरस ने लंदन विश्व विद्यालय के यहूदी इतिहास के प्रोफेसर टुदोर पार्फीट तथा रूस की भाषा विद इतिहासकार डॉ युलिया एगोरोव के साथ एक अन्तर राष्ट्रीय शोध दल का गठन कीया

आफरीदी पठानों के इज्राएली जुडाव को सामने लाने वाले डॉ नवरस आफरीदी ख़ुद आफरीदी पठान हैंनवरस बताते हैं, "जब में १२ साल का था टैब मेरे ताऊ ने मुझे बताया था की बहुत सम्भव है की हम इज्राएली मूल के आफरीदी पठान हैंबस तभी मैंने यह फैसला कर लिया था की अपनी जड़ों का पता ज़रूर लगाऊँगानवम्बर २००२ में मध्य कालीन आधुनिक भार्तिये इतिहास वीभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर वी ड़ी पांडे के नीरदेशन में अपना शोध शुरू कियाइसे पूरा होने में तीन साल लग गए२००५ में में नवरस को पी एच ड़ी की उपाधी प्रदान की गयीउत्तर प्रदेश में आफरीदी पठान मुख्य रूप से मलीहाबाद और फर्रुखाबाद जीले की कायमगंज तहसील में रहते हैंइसके अलावा रामपुर, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बदायूं और हरदोई जीले में शाहाबाद में भी इनकी कुछ आबादी रहती है

नवरस से पहले इस शोध में उनके सहयोगी प्रोफेसर पारफीट मुम्बई, पूने, थाने, और अहमदाबाद में रह रहे ,००० बेनी इसराइल का सम्भंद यहूदियों से साबीत कर चुके हैंडॉ पारफीट का नाम अफ्रीका के लुप्त कबीले लिम्बा और यमन के प्राचीन नगर 'सेना' को खोजने के लिए भी लिया जाता हैपारफीट ने जेनेटिक शोधों के ज़रिये दवा किया है की वास्तव में मराठी यहूदी हजरत मूसा के भाई ऐरन के वंशज हैंदुनिया भर में छोटी-छोटी आबादी में रह रहे यहूदियों को खोज नीकआलने का काम आज से क़रीब १२-१३ साल पहले शुरू हो चुका है१९९३ में येरुशलम रिपोर्ट में एक लेख प्रकाशित हुआ जिस में पठानों की इज्राएली सम्भंद में गहन अध्यन थाइसके अलावा २००२ में अमेरीकी फ़िल्म निर्माता सिम्खा याकोवित्सी को पठानों की इज्राएली उत्पत्ती पर बने वृत्त चित्र लिए एमी पुरस्कार प्रदान किया गयाइसके अलावा स्कूल ऑफ ओरिएण्टल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ , लंदों में आफरीदी पठानों का इज्राएली सम्भंद स्थापीत करने के लिए शोध चल रहा हैयेरुशलम में बेन-ज्वी अनुसंधान से प्राप्त इसराइल के दूसरे राष्ट्रपती और विश्वविख्यात इतिहासकार यिजाक बेन-ज्वी की वर्ष १९५७ की प्रकाशित पुस्तक ' एक्जैलेद एंड दा रीडीम्द' में ऐसी एक दर्जन से अधीक यहूदी परम्पराओं और रस्मों के बारे में ज़िक्र किया है जो आफरीदी पठानों में में प्रचलित हैं

इसराइल में दुनिया भर में बसे यहूदियों को अपने वतन, अपने लोगों के बीच वापस बुलाने के लिए घर वापसी का कानून बनाया हैइसके बाद वहाँ के कई घैर-सरकारी संगठनों ने मलीहाबाद सहित भारत के अन्य इलाकों में रह रहे आफरीदी पठानों के वंशजों को निमंत्रण पत्र भेजा है

इसराइल के लुप्त कबीलों और यहूदियों को खोजने उन्हें अपने पूर्वजों की भूमि लौटाने का आमंत्रण देने वाली इज्राएली संस्था आमीशाव ने मलीहाबाद के कई लोगों को उनकी वर्तमान स्थीती से एक पायेदान ऊपर अपने समाज में स्थापित करने का भरोसा दिलाते हुए 'घर-वापसी' का संदेश भेजा है

तेल अवीव युनीव्र्सीती ने डॉ आफरीदी को आमंत्रित कीया है इज्रईली मूल के मुसलमानों पर पोस्ट-डोक्तोरल रीसर्च के लियेभारत के मानव वीकआस मंत्रालय ने स्कोलार्शीप के लिए मनोनीत कीया है

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